Wednesday, July 12, 2017

सुनो

सुनो,
कुछ कहना है तुमसे।

अगर मैं तुम्हें
मन ही मन पसंद करूँ
तो तुम्हें ऐतराज तो ना होगा?
तुम नाराज़ तो ना होगी?

तुम जानती हो!
मैं रात भर जगने लगा हूँ
तुम्हारी ख़ातिर।
कुछ मतलब की बातें खोजता हूँ।
बातें,
जो तुमसे अगले दिन कर पाऊँ।

तेज धड़कनों की आवाज़
सुनी है तुमने?
कभी ख़ामोशी में
मेरे नज़दीक आना।

और हाँ!
एक बात और,
जब तुम
जाने लगती हो ना,
मेरे कदम भी
तुम्हारे पीछे जाने के लिए
मचलने लगते हैं।

तुम्हें
ये सब पता नहीं होगा।

कभी कभार,
थोड़ा चालाकी से देखना
कि मैं कैसे तुम्हें
छुप छुप कर देखता हूँ।
और देखना,
मेरे चेहरे की रौनक
जो तुम्हारे मुस्कुराने से आती है
जब तुम मेरी तरफ़ देखती हो।

सुन रही हो ना?
अब समझ भी जाओ ना
कि ये तुम ही हो।

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