Monday, June 27, 2016

विचलित मन

विचलित मन
चाहता है
सपनों की राह बदलना।

पर घबराता है
यह सोचकर
जीवन कठिन है।

फिर ठिठक कर
कुछ पल
ठहर जाता है।

सपनों की नयी राह पर
डगमगाता सा
बढ़ने लगता है।

यह सोचकर
जीवन एक ही बार मिलता है।

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